Religion & Philosophy

बाबा खाटू श्याम: हारे का सहारा

बाबा खाटू श्याम वीर बर्बरीक का दिव्य स्वरूप हैं, जिन्हें कृष्ण से वरदान प्राप्त है और जो हारे हुओं का सहारा माने जाते हैं।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

परिचय

बाबा खाटू श्याम को महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक का दिव्य स्वरूप माना जाता है, जिन्हें भगवान कृष्ण ने कलियुग में "श्याम" नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। राजस्थान में उनकी भक्ति अत्यंत व्यापक और लोकप्रिय है।

स्वरूप

बाबा खाटू श्याम को मुखाकृति (शीश) रूप में पूजा जाता है, जो उनकी कथा से संबंधित है। उन्हें राजसी वस्त्र, मुकुट और आभूषणों से अलंकृत दर्शाया जाता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, बर्बरीक भीम के पुत्र घटोत्कच के पुत्र थे और अत्यंत शक्तिशाली वीर थे। महाभारत युद्ध से पूर्व उन्होंने हारने वाले पक्ष की सहायता करने का संकल्प लिया था। भगवान कृष्ण ने उनकी परीक्षा ली और जब बर्बरीक ने अपनी अद्भुत शक्ति प्रदर्शित की, तो कृष्ण ने उनसे शीश दान माँगा। बर्बरीक ने प्रसन्नता से अपना शीश दान कर दिया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें कलियुग में "श्याम" नाम से पूजे जाने का वरदान दिया।

पूजा और महत्व

खाटू श्याम मेला प्रत्येक वर्ष फाल्गुन माह में आयोजित होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु राजस्थान के खाटू नगर पहुँचते हैं। "हारे का सहारा" के रूप में प्रसिद्ध बाबा श्याम को कठिन समय में सहायता करने वाला देवता माना जाता है।

मंत्र

"श्याम बाबा की जय" का जयघोष तथा "खाटू श्याम आरती" भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।

प्रमुख मंदिर

खाटू श्याम मंदिर (सीकर, राजस्थान) बाबा श्याम का सबसे प्रमुख और श्रद्धा का केंद्र है।

निष्कर्ष

बाबा खाटू श्याम त्याग, वीरता और भक्ति के प्रतीक हैं। उनकी कथा बलिदान और निष्ठा की सर्वोच्च मिसाल प्रस्तुत करती है।

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