Religion & Philosophy

भगवान भैरव: रक्षक और न्याय के देवता

भगवान भैरव शिव जी का प्रचंड रूप हैं, जिन्हें काशी नगरी का संरक्षक और भय-नाशक देवता माना जाता है।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

परिचय

भगवान भैरव को भगवान शिव का अत्यंत प्रचंड और रक्षक रूप माना जाता है। उन्हें भय और बुराई का नाश करने वाला तथा भक्तों की रक्षा करने वाला देवता माना जाता है। काल भैरव और बटुक भैरव उनके प्रमुख रूप हैं।

स्वरूप

भगवान भैरव को प्रचंड रूप, हाथ में त्रिशूल, डमरू और खप्पर लिए हुए, तथा श्वान (कुत्ता) पर सवार दर्शाया जाता है। श्वान को उनका वाहन माना जाता है, जो निष्ठा और सतर्कता का प्रतीक है।

पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान भैरव को काशी नगरी का संरक्षक देवता माना जाता है। मान्यता है कि काशी में किसी भी यात्रा या पूजा से पूर्व भैरव जी के दर्शन और अनुमति लेना आवश्यक माना जाता है। प्रत्येक शक्तिपीठ के समीप भी एक भैरव मंदिर स्थापित मिलता है, जो देवी की रक्षा करते हैं।

पूजा और महत्व

भैरव अष्टमी के अवसर पर भगवान भैरव की विशेष पूजा की जाती है। भक्त उन्हें तेल, सिंदूर और मदिरा अर्पित करते हैं तथा सुरक्षा एवं संकटों से रक्षा की कामना करते हैं।

मंत्र

"ॐ भैरवाय नमः" मंत्र का जाप भक्तगण रक्षा और निर्भयता की प्राप्ति के लिए करते हैं।

प्रमुख मंदिर

काल भैरव मंदिर (वाराणसी) और भैरवनाथ मंदिर (उज्जैन) भगवान भैरव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में सम्मिलित हैं।

निष्कर्ष

भगवान भैरव रक्षा, निर्भयता और न्याय के प्रतीक हैं। उनकी आराधना भक्तों को भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति प्रदान करती है।

#भैरव#काशी#हिंदू देवता#भारतीय संस्कृति#धर्म

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