Religion & Philosophy

भगवान ब्रह्मा: सृष्टि के रचयिता

भगवान ब्रह्मा त्रिदेवों में सृष्टि के रचयिता हैं, जिन्हें चतुर्मुख रूप और चार वेदों का प्रतीक माना जाता है।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

परिचय

भगवान ब्रह्मा हिंदू धर्म के त्रिदेवों में सृष्टि के रचयिता हैं। उन्हें संपूर्ण ब्रह्मांड, पृथ्वी और समस्त जीवों की उत्पत्ति का कारण माना जाता है। यद्यपि वे सृष्टि के रचनाकार हैं, फिर भी आज के समय में उनकी पूजा अन्य देवताओं की तुलना में सीमित मंदिरों में होती है, जिसके पीछे अनेक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं।

स्वरूप

भगवान ब्रह्मा को चतुर्मुख (चार मुख) और चतुर्भुज रूप में दर्शाया जाता है। उनके चार मुख चार वेदों - ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद - के प्रतीक माने जाते हैं। उनका वाहन हंस है, जो विवेक और ज्ञान का प्रतीक है। वे प्रायः कमंडल, वेद ग्रंथ, माला और कमल धारण किए हुए दर्शाए जाते हैं।

उत्पत्ति की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान ब्रह्मा भगवान विष्णु की नाभि से उत्पन्न कमल से प्रकट हुए थे, जब विष्णु जी क्षीरसागर में शेषनाग की शैय्या पर विराजमान थे। इसके पश्चात भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना का कार्य प्रारंभ किया।

परिवार

माता सरस्वती भगवान ब्रह्मा की पत्नी हैं, जो ज्ञान और विद्या की देवी मानी जाती हैं। दोनों का संबंध सृजन और ज्ञान के मिलन का प्रतीक है।

पूजा और महत्व

भारत में भगवान ब्रह्मा को समर्पित मंदिर अत्यंत दुर्लभ हैं, जिनमें राजस्थान के पुष्कर स्थित ब्रह्मा मंदिर सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन माना जाता है। यहाँ प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर विशेष मेला और पूजा का आयोजन होता है।

मंत्र

"ॐ ब्रह्मणे नमः" मंत्र का जाप भक्तगण ज्ञान और सृजनात्मकता की प्राप्ति के लिए करते हैं।

निष्कर्ष

भगवान ब्रह्मा सृष्टि, ज्ञान और रचनात्मकता के प्रतीक हैं। यद्यपि उनकी पूजा सीमित है, फिर भी सृष्टि के आरंभकर्ता के रूप में उनका स्थान हिंदू धर्म के मूल सिद्धांतों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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