भगवान धन्वंतरि: आयुर्वेद और आरोग्य के देवता
भगवान धन्वंतरि विष्णु के अवतार और आयुर्वेद के प्रवर्तक हैं, जिनकी पूजा धनतेरस पर आरोग्य की कामना से की जाती है।
परिचय
भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा विज्ञान के देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है, जो रोगों के नाश और आरोग्य प्रदान करने हेतु अवतरित हुए। चिकित्सक और वैद्य वर्ग उन्हें विशेष श्रद्धा से पूजते हैं।
स्वरूप
भगवान धन्वंतरि को चतुर्भुज रूप में, हाथों में अमृत कलश, शंख, चक्र और औषधीय जड़ी-बूटी (जैसे जलूका या आयुर्वेदिक पात्र) धारण किए हुए दर्शाया जाता है।
पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के समय अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद के प्रथम प्रवर्तक के रूप में पूजा जाता है, जिन्होंने मानवता को रोगमुक्त जीवन जीने हेतु चिकित्सा विज्ञान का ज्ञान प्रदान किया।
पूजा और महत्व
धनतेरस का पर्व भगवान धन्वंतरि की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिस दिन आरोग्य और स्वास्थ्य की कामना से विशेष पूजा की जाती है। राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी धनतेरस के दिन ही मनाया जाता है।
मंत्र
"ॐ धन्वंतरये नमः" मंत्र का जाप आरोग्य और दीर्घायु की प्राप्ति हेतु किया जाता है।
निष्कर्ष
भगवान धन्वंतरि आरोग्य, चिकित्सा और स्वास्थ्य विज्ञान के प्रेरणास्रोत हैं। उनकी पूजा हमें स्वस्थ जीवन के महत्व का संदेश देती है।