Religion & Philosophy

भगवान कुबेर: धन के कोषाध्यक्ष देवता

भगवान कुबेर यक्षों के राजा और धन के कोषाध्यक्ष देवता हैं, जिनकी पूजा धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ की जाती है।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

परिचय

भगवान कुबेर को धन और संपत्ति के कोषाध्यक्ष देवता के रूप में पूजा जाता है। वे यक्षों के राजा और देवताओं के धनाध्यक्ष माने जाते हैं। उनकी पूजा से भौतिक समृद्धि, धन-संपत्ति और सुरक्षा की कामना की जाती है।

स्वरूप

भगवान कुबेर को स्थूल शरीर, स्वर्ण आभा और हाथ में धन की थैली या नकुल (नेवला) लिए हुए दर्शाया जाता है, जिसके मुख से रत्न निकलते दिखाए जाते हैं। उनका वाहन प्रायः मनुष्य या हाथी माना जाता है।

पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कुबेर ऋषि विश्रवा के पुत्र हैं। उन्हें भगवान शिव द्वारा उत्तर दिशा का स्वामी और धन का संरक्षक नियुक्त किया गया था। पुष्पक विमान, जो रावण के पास था, मूल रूप से कुबेर का ही माना जाता है।

पूजा और महत्व

धनतेरस के अवसर पर भगवान कुबेर की पूजा माता लक्ष्मी के साथ की जाती है, जो दीपावली के पर्व की शुरुआत का प्रतीक है। व्यापारी वर्ग विशेष रूप से समृद्धि और सुरक्षित धन-संचय की कामना से उनकी आराधना करते हैं।

मंत्र

"ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धन धान्याधिपतये नमः" मंत्र का जाप भक्तगण धन प्राप्ति की कामना से करते हैं।

निष्कर्ष

भगवान कुबेर धन, सुरक्षा और समृद्धि के संरक्षक देवता हैं। उनकी पूजा से भक्तों को आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

#कुबेर#धनतेरस#हिंदू देवता#भारतीय संस्कृति#धर्म

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