Religion & Philosophy

भगवान विश्वकर्मा: शिल्पकला और निर्माण के देवता

भगवान विश्वकर्मा को दिव्य शिल्पकार और स्थापत्य कला का देवता माना जाता है, जो कारीगरों और इंजीनियरों के आराध्य हैं।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

परिचय

भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का दिव्य शिल्पकार और स्थापत्य कला के देवता माना जाता है। उन्हें इंजीनियरों, शिल्पकारों, कारीगरों और निर्माण से जुड़े सभी व्यवसायियों का आराध्य देवता माना जाता है। उनकी पूजा विशेष रूप से औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा से की जाती है।

स्वरूप

भगवान विश्वकर्मा को हाथों में विभिन्न उपकरण - कमंडल, पुस्तक, हथौड़ा और मापने का यंत्र - धारण किए हुए दर्शाया जाता है, जो उनकी शिल्पकला और सृजनात्मकता का प्रतीक हैं।

पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए अनेक दिव्य भवनों, अस्त्रों और नगरों का निर्माण किया। द्वारका नगरी, लंका तथा पांडवों की इंद्रप्रस्थ नगरी का निर्माण भी उन्हीं के द्वारा किया गया माना जाता है। उन्हें देवताओं का शिल्पी (दिव्य वास्तुकार) कहा जाता है।

पूजा और महत्व

विश्वकर्मा पूजा प्रत्येक वर्ष सितंबर माह में मनाई जाती है, जिस दिन कारखानों, फैक्ट्रियों और कार्यशालाओं में मशीनों एवं उपकरणों की विशेष पूजा की जाती है। यह पर्व श्रम, कौशल और निर्माण कार्य के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

मंत्र

"ॐ विश्वकर्मणे नमः" मंत्र का जाप शिल्पकार और कारीगर वर्ग श्रद्धा से करते हैं।

निष्कर्ष

भगवान विश्वकर्मा सृजनात्मकता, कौशल और श्रम के सम्मान के प्रतीक हैं। उनकी पूजा हमें यह सिखाती है कि कुशल श्रम और समर्पण से ही महान निर्माण संभव है।

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