Religion & Philosophy

भगवान यम: धर्म और न्याय के देवता

भगवान यम धर्मराज और न्याय के देवता हैं, जो आत्माओं को उनके कर्मों के अनुसार न्यायपूर्ण फल प्रदान करते हैं।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

परिचय

भगवान यम को धर्म, न्याय और मृत्यु के देवता के रूप में पूजा जाता है। वे आत्माओं को उनके कर्मों के अनुसार न्याय प्रदान करने वाले देवता माने जाते हैं। उन्हें "धर्मराज" भी कहा जाता है, क्योंकि वे सदैव निष्पक्ष और न्यायपूर्ण निर्णय लेते हैं।

स्वरूप

भगवान यम को गहरे रंग, राजसी वस्त्र और हाथ में गदा या पाश (रस्सी) लिए हुए दर्शाया जाता है। उनका वाहन भैंसा (महिष) है, जो शक्ति और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान यम सूर्य देव और छाया देवी के पुत्र हैं। वे मृत्यु के पश्चात आत्माओं को उनके कर्मों का फल निर्धारित करने का दायित्व निभाते हैं। नचिकेता की कथा में यम और एक युवा ऋषि बालक के बीच आत्मा और जीवन के रहस्यों पर हुई चर्चा कठोपनिषद में वर्णित है, जो भारतीय दर्शन का अमूल्य भाग मानी जाती है।

पूजा और महत्व

यम द्वितीया (भाई दूज) के अवसर पर भगवान यम और उनकी बहन यमुना की कथा का स्मरण किया जाता है, जो भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पर्व है। धनतेरस से पूर्व "यम दीपदान" की परंपरा भी प्रचलित है, जिसमें अकाल मृत्यु से रक्षा हेतु दीप जलाए जाते हैं।

मंत्र

"ॐ यमाय नमः" मंत्र का जाप दीर्घायु और सुरक्षा की कामना से किया जाता है।

निष्कर्ष

भगवान यम न्याय, धर्म और कर्मफल के सिद्धांत के प्रतीक हैं। उनकी कथाएँ हमें यह सिखाती हैं कि जीवन में किए गए कर्मों का फल अवश्य मिलता है, इसलिए धर्मपूर्वक जीवन व्यतीत करना चाहिए।

#यम#भाई दूज#हिंदू देवता#भारतीय संस्कृति#धर्म

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