Religion & Philosophy

माता अन्नपूर्णा: अन्न और पोषण की देवी

माता अन्नपूर्णा अन्न, पोषण और तृप्ति की देवी हैं, जो माता पार्वती का ही करुणामयी स्वरूप मानी जाती हैं।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

परिचय

माता अन्नपूर्णा को अन्न, पोषण और तृप्ति की देवी माना जाता है। वे माता पार्वती का ही एक रूप हैं, जो संसार के समस्त जीवों को भोजन प्रदान करने वाली करुणामयी देवी के रूप में पूजी जाती हैं। उन्हें भोजन और आतिथ्य की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

स्वरूप

माता अन्नपूर्णा को एक हाथ में अन्न से भरा पात्र और दूसरे हाथ में चम्मच लिए हुए दर्शाया जाता है, जो यह दर्शाता है कि वे सदैव भक्तों को भोजन और पोषण प्रदान करने हेतु तत्पर रहती हैं।

पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने संसार को मोह-माया कहकर अन्न के महत्व को नकारा, जिससे संसार में भीषण अन्न संकट उत्पन्न हो गया। माता पार्वती ने अन्नपूर्णा का रूप धारण कर संसार को भोजन प्रदान किया और भगवान शिव को भी भिक्षा देकर यह सिखाया कि अन्न और भोजन के बिना जीवन और साधना दोनों असंभव हैं।

पूजा और महत्व

अन्नपूर्णा जयंती के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जिसमें भोजन और अन्न दान का विशेष महत्व माना जाता है। काशी (वाराणसी) में माता अन्नपूर्णा की पूजा अत्यंत श्रद्धा से की जाती है, जहाँ उन्हें नगर की रक्षिका देवी माना जाता है।

मंत्र

"ॐ अन्नपूर्णायै नमः" मंत्र का जाप भोजन और समृद्धि की कामना से किया जाता है।

प्रमुख मंदिर

वाराणसी का अन्नपूर्णा मंदिर माता अन्नपूर्णा का सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के निकट स्थित है।

निष्कर्ष

माता अन्नपूर्णा पोषण, तृप्ति और सेवा भाव की प्रतीक हैं। उनकी पूजा हमें अन्न के महत्व और निःस्वार्थ सेवा का संदेश देती है।

#अन्नपूर्णा#काशी#हिंदू देवी#भारतीय संस्कृति#धर्म

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