माता बहुचरा: गुजरात की कुलदेवी
माता बहुचरा गुजरात की प्रमुख लोक देवी हैं, जिनकी पूजा सामाजिक समावेशन और सर्वसमावेशी भक्ति परंपरा का प्रतीक मानी जाती है।
परिचय
माता बहुचरा गुजरात की प्रमुख लोक देवियों में से एक हैं, जिन्हें विशेष रूप से किन्नर (तृतीय लिंग) समुदाय की कुलदेवी और आराध्य देवी के रूप में पूजा जाता है। उन्हें माता दुर्गा का ही एक स्वरूप माना जाता है।
स्वरूप
माता बहुचरा को मुर्गे (वाहन) पर सवार, हाथ में त्रिशूल और तलवार लिए हुए दर्शाया जाता है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है।
पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं में माता बहुचरा से जुड़ी अनेक मान्यताएँ प्रचलित हैं, जो उन्हें सामाजिक समावेशन और सभी वर्गों के प्रति समान भक्ति भाव की देवी के रूप में प्रस्तुत करती हैं। उन्हें गुजरात के चुनवाल क्षेत्र की कुलदेवी भी माना जाता है।
पूजा और महत्व
बेचराजी मंदिर में प्रत्येक वर्ष विशेष मेले और पूजा का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु एवं किन्नर समुदाय के लोग दर्शन हेतु पहुँचते हैं। यह मंदिर सामाजिक समावेशन और आस्था का अद्भुत प्रतीक माना जाता है।
मंत्र
"जय बहुचरा माता" का जयघोष भक्तगण श्रद्धा से करते हैं।
प्रमुख मंदिर
बेचराजी मंदिर (मेहसाणा, गुजरात) माता बहुचरा की भक्ति का सबसे प्रमुख केंद्र है।
निष्कर्ष
माता बहुचरा शक्ति, समावेशन और सामाजिक समानता की प्रतीक हैं। उनकी पूजा भारतीय संस्कृति की विविधता और सर्वसमावेशी भक्ति परंपरा को दर्शाती है।