Religion & Philosophy

माता गंगा: मोक्षदायिनी पवित्र नदी देवी

माता गंगा भारत की सबसे पवित्र नदी और मोक्षदायिनी देवी हैं, जिनका अवतरण राजा भगीरथ की तपस्या से जुड़ा है।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

परिचय

माता गंगा को भारतीय संस्कृति में सबसे पवित्र नदी और देवी के रूप में पूजा जाता है। उन्हें पापों का नाश करने वाली, मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी देवी माना जाता है। करोड़ों भारतीयों के लिए गंगा नदी में स्नान करना आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है।

स्वरूप

माता गंगा को श्वेत वस्त्र धारण किए, मकर (मगरमच्छ) पर सवार और हाथ में कमंडल लिए हुए दर्शाया जाता है। उनका प्रवाह शुद्धता, करुणा और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के फलस्वरूप अवतरित हुई थीं, ताकि वे अपने पूर्वजों को मुक्ति दिला सकें। गंगा के प्रचंड प्रवाह को संभालने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया, जिसके बाद वे धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित हुईं। इस कारण उन्हें "जटाशंकरी" भी कहा जाता है।

पूजा और महत्व

गंगा दशहरा माता गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के उपलक्ष्य में मनाया जाने वाला प्रमुख पर्व है। कुंभ मेला, जो विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है, गंगा के तटों पर ही आयोजित होता है। हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज गंगा स्नान और आरती के लिए विश्वप्रसिद्ध स्थल हैं।

मंत्र

"ॐ गंगायै नमः" मंत्र का जाप तथा गंगा आरती भक्तगण श्रद्धा से करते हैं।

निष्कर्ष

माता गंगा शुद्धता, मोक्ष और जीवनदान का प्रतीक हैं। उनकी पूजा और संरक्षण भारतीय संस्कृति की आस्था और पर्यावरणीय चेतना दोनों का अभिन्न अंग है।

#गंगा#कुंभ मेला#हिंदू देवी#भारतीय संस्कृति#धर्म

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