माता यमुना: कृष्ण लीला की पवित्र साक्षी नदी
माता यमुना सूर्यपुत्री और भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं की साक्षी पवित्र नदी देवी हैं, जिनकी पूजा वृंदावन में विशेष रूप से होती है।
परिचय
माता यमुना भारत की पवित्र नदियों में से एक तथा भगवान कृष्ण की लीला भूमि से जुड़ी देवी हैं। उन्हें सूर्य देव की पुत्री और भगवान यम की बहन माना जाता है। वृंदावन और मथुरा में उनकी पूजा अत्यंत श्रद्धा से की जाती है।
स्वरूप
माता यमुना को श्याम वर्ण, कमल पर बैठी या कूर्म (कछुए) पर सवार दर्शाया जाता है, जो उनकी शीतलता और गहराई का प्रतीक माना जाता है।
पौराणिक महत्व
भगवान कृष्ण की अनेक बाल लीलाएँ, जैसे कालिया नाग का दमन, यमुना नदी में ही हुई मानी जाती हैं। उन्हें कृष्ण भक्ति और लीला स्थल की साक्षी देवी माना जाता है, जो वृंदावन की पवित्रता का अभिन्न अंग है।
पूजा और महत्व
यमुना छठ और यम द्वितीया (भाई दूज) के अवसर पर माता यमुना की विशेष पूजा की जाती है, जो भाई-बहन के संबंधों के महत्व को भी दर्शाती है। यमुना आरती वृंदावन में प्रतिदिन संध्या समय अत्यंत भक्तिभाव से की जाती है।
मंत्र
"ॐ यमुनायै नमः" मंत्र का जाप भक्तगण श्रद्धा से करते हैं।
निष्कर्ष
माता यमुना भक्ति, पवित्रता और कृष्ण लीला की साक्षी देवी हैं। उनकी पूजा वृंदावन की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।