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प्यासा कौआ

एक प्यासे कौए की बुद्धिमत्ता की कहानी, जो कंकड़ डालकर घड़े का पानी पीने लायक बना लेता है।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

गर्मी के दिनों में एक कौआ बहुत प्यासा होकर पानी की खोज में उड़ रहा था। उसने बहुत देर तक उड़ान भरी, पर उसे कहीं भी पानी नहीं मिला। उसकी प्यास से उसका गला सूख गया था और वह बहुत थक भी गया था।

उड़ते-उड़ते उसे एक घर के बाहर एक मटका दिखा। वह खुशी से उस मटके के पास उड़कर गया, पर जब उसने मटके के भीतर झाँका तो देखा कि पानी मटके के बहुत नीचे था। उसकी चोंच पानी तक नहीं पहुँच पा रही थी।

कौआ बहुत परेशान हो गया। उसने मटके को धकेलने की कोशिश की, पर मटका बहुत भारी था और हिला भी नहीं। वह उड़कर मटके के अंदर जाने की भी कोशिश करता, तो भी चोंच पानी तक नहीं पहुँचती।

कुछ देर सोचने के बाद कौए के मन में एक तरकीब आई। उसने आसपास नज़र दौड़ाई और देखा कि वहाँ बहुत से छोटे-छोटे कंकड़ पड़े हुए थे। उसने एक-एक कंकड़ उठाकर मटके में डालना शुरू किया।

जैसे-जैसे कौआ कंकड़ डालता गया, मटके के अंदर का पानी धीरे-धीरे ऊपर आने लगा। उसने बहुत सारे कंकड़ डाले और कुछ समय बाद पानी मटके के मुँह तक आ गया।

अब कौए ने आसानी से अपनी चोंच मटके में डाली और जी भरकर पानी पिया। उसकी प्यास बुझ गई और वह बहुत खुश हुआ। फिर वह अपने रास्ते उड़ गया।

शिक्षा: कठिन परिस्थितियों में भी बुद्धि और धैर्य से काम लेने पर समाधान मिल जाता है। "जहाँ चाह, वहाँ राह।"

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