भारुंड पक्षी के दो सिर
एक ही शरीर पर दो सिर वाले पक्षी की कहानी, जो आपसी फूट के बुरे परिणाम को दर्शाती है।
एक जंगल में एक अनोखा पक्षी रहता था, जिसका नाम भारुंड था। इस पक्षी का शरीर तो एक ही था, पर उसके दो सिर थे। दोनों सिर अलग-अलग सोचते थे, पर पेट एक ही था, इसलिए जो भी भोजन एक सिर खाता, वह दोनों सिरों का पेट भरता था।
एक दिन पक्षी जंगल में घूमते-घूमते एक पेड़ के नीचे पहुँचा, जहाँ उसे एक स्वादिष्ट और दिव्य फल मिला। पक्षी के एक सिर ने वह फल खा लिया। उसे फल इतना अच्छा लगा कि वह तृप्त और संतुष्ट हो गया।
यह देखकर दूसरे सिर को बहुत ईर्ष्या हुई। उसने गुस्से में कहा, "तुमने मुझसे पूछे बिना यह दिव्य फल क्यों खा लिया? मुझे भी इसे खाने का मन था!" पहले सिर ने समझाने की कोशिश की, "हमारा पेट तो एक ही है, मैंने खाया तो तुम्हारा भी पेट भर गया, इसमें गुस्सा करने की क्या बात है?"
पर दूसरा सिर नहीं माना और उसके मन में बदले की भावना आ गई। कुछ दिनों बाद, उसी दूसरे सिर को रास्ते में एक ज़हरीला फल मिला। उसने सोचा, "मैं इस ज़हरीले फल को खाकर अपने साथी सिर को सबक सिखाऊँगा, चाहे मुझे भी नुकसान हो।"
पहले सिर ने मना किया, "ऐसा मत करो! यह ज़हरीला फल खाने से हमारा शरीर एक ही है, इसे खाने से हम दोनों मर जाएँगे!" पर दूसरा सिर अपनी ईर्ष्या और गुस्से में इतना अंधा हो गया था कि उसने एक न सुनी और वह ज़हरीला फल खा लिया।
जैसा कि पहले सिर ने चेतावनी दी थी, ज़हर पूरे शरीर में फैल गया, और कुछ ही समय में पूरा पक्षी, दोनों सिरों के साथ, मर गया। आपसी फूट और ईर्ष्या ने एक ही शरीर के दोनों हिस्सों का नाश कर दिया।
शिक्षा: आपसी फूट और ईर्ष्या से कभी कोई भला नहीं होता। एक ही परिवार या समूह के सदस्यों को एकता और सहयोग से रहना चाहिए, नहीं तो दोनों पक्षों का नुकसान होता है।