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बिल्ली का न्याय

एक तीतर और खरगोश के झगड़े में बिल्ली के झूठे न्याय की कहानी, जो किसी अनजान पर भरोसे की सीख देती है।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

एक जंगल में एक तीतर अपने घोंसले में रहती थी। एक दिन वह कुछ दिनों के लिए भोजन की खोज में दूर चली गई। उसकी अनुपस्थिति में एक खरगोश आया और उस खाली घोंसले में रहने लगा।

जब तीतर वापस लौटी, तो उसने देखा कि उसके घोंसले में खरगोश रह रहा है। उसने खरगोश से कहा, "यह मेरा घोंसला है, कृपया इसे छोड़ दो।" पर खरगोश ने मना कर दिया, "अब यह मेरा घर है, मैं यहीं रहूँगा। तुम कहीं और चली जाओ।"

दोनों के बीच बहुत झगड़ा हुआ, पर कोई हल नहीं निकला। तभी पास से एक बिल्ली गुज़री, जो बहुत पवित्र और शांत दिखने का नाटक कर रही थी। उसने आँखें बंद करके धर्म और न्याय की बातें करते हुए कहा, "मैं तुम दोनों के झगड़े को शांति से सुलझा सकती हूँ। मेरे पास आओ, मैं निष्पक्ष न्याय करूँगी।"

तीतर और खरगोश दोनों को लगा कि बिल्ली सच में बहुत धार्मिक और भरोसेमंद है। वे दोनों उसके पास चले गए, ताकि वह उनके बीच न्याय कर सके। बिल्ली ने कहा, "मेरे पास आओ, मेरी सुनने की शक्ति कमज़ोर है, तुम दोनों थोड़ा पास आकर अपनी बात कहो।"

दोनों, एक-दूसरे पर भरोसा न होने के बावजूद, बिल्ली की पवित्रता पर भरोसा करके उसके पास आ गए। जैसे ही वे दोनों बिल्ली की पकड़ में आए, बिल्ली ने अपने पंजे और दाँतों का इस्तेमाल करते हुए बड़ी फुर्ती से दोनों को पकड़ लिया और एक-एक करके दोनों को खा गई।

इस तरह तीतर और खरगोश, जो आपस में झगड़ रहे थे, अपने झगड़े को सुलझाने के लिए एक अनजान और धोखेबाज़ "न्यायाधीश" पर भरोसा करके अपनी जान से हाथ धो बैठे।

शिक्षा: आपस के झगड़ों को सुलझाने के लिए किसी अनजान और संदेहास्पद व्यक्ति पर अंधा भरोसा करना खतरनाक हो सकता है। अपनी समस्याओं का हल खुद मिलकर निकालना चाहिए।

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