हिरण, कौआ और धोखेबाज़ सियार
एक धोखेबाज़ सियार की कहानी, जो एक भोले हिरण को जाल में फँसाना चाहता है, पर एक समझदार कौए के कारण उसकी चाल नाकाम हो जाती है।
एक जंगल में एक हिरण और एक कौआ बहुत अच्छे मित्र थे। दोनों रोज़ साथ समय बिताते और एक-दूसरे की मदद करते थे। उस जंगल में एक सियार भी रहता था, जो बहुत लालची और धोखेबाज़ था।
सियार की नज़र हिरण के स्वादिष्ट मांस पर थी, पर वह जानता था कि वह सीधे हिरण पर हमला नहीं कर सकता, क्योंकि हिरण उससे कहीं तेज़ दौड़ता था। इसलिए उसने एक चाल सोची। वह हिरण के पास गया और दोस्ती का नाटक करते हुए बोला, "मित्र, मैंने पास के खेत में बहुत स्वादिष्ट और रसीली फसल देखी है, चलो साथ चलकर खाते हैं।"
हिरण को सियार की बातों पर भरोसा हो गया और वह उसके साथ खेत की ओर चल पड़ा। पर असल में सियार उस हिरण को एक ऐसे खेत में ले जा रहा था, जहाँ किसान ने जानवरों को पकड़ने के लिए एक छिपा हुआ जाल बिछा रखा था। सियार जानता था कि अगर हिरण जाल में फँस जाएगा, तो वह मर जाएगा, और सियार उसका मांस खा सकेगा।
जैसे ही हिरण खेत में घुसा, वह उस छिपे हुए जाल में फँस गया। वह बहुत तड़पने और चिल्लाने लगा। यह देखकर सियार मन ही मन बहुत खुश हुआ, पर उसने हिरण के सामने दुख जताने का नाटक किया, "हाय, यह तो बहुत बुरा हुआ!"
उनका मित्र कौआ, जो दूर से उड़ता हुआ यह सब देख रहा था, तुरंत समझ गया कि सियार की यह चाल जानबूझकर रची गई थी। वह नीचे उतरा और हिरण के पास जाकर बोला, "घबराओ नहीं, मैं अभी किसान को इस तरह व्यस्त रखूँगा कि वह यहाँ न आ पाए, तुम तब तक खुद को जाल से मुक्त करने की कोशिश करो।"
कौआ किसान के घर के पास गया और उसके पालतू कुत्ते को भड़काकर उसका ध्यान भटका दिया, जिससे किसान कुछ समय के लिए वहीं उलझ गया। इस बीच हिरण ने अपनी पूरी ताकत लगाकर जाल को तोड़ डाला और भाग निकला।
जब किसान वापस खेत में आया, तो उसे न तो हिरण मिला, न ही टूटा हुआ जाल समझ में आया। निराश सियार भी खाली हाथ वहाँ से चला गया, और हिरण ने अपने सच्चे मित्र कौए का धन्यवाद किया।
शिक्षा: हर मित्रता का प्रस्ताव सच्चा नहीं होता, इसलिए सावधानी और सतर्कता ज़रूरी है। साथ ही, सच्चा मित्र मुसीबत में सबसे पहले मदद के लिए आगे आता है।