करटक और दमनक
दो चालाक सियारों की कहानी, जो अपनी चतुराई और चालबाज़ी से शेर और बैल के बीच गलतफहमी और लड़ाई करवा देते हैं।
एक जंगल में पिंगलक नाम का एक शेर रहता था, जो जंगल का राजा था। उसके दो सियार मंत्री थे, करटक और दमनक, जो पहले राजा के पिता के सेवक हुआ करते थे, पर अब उन्हें कोई खास काम नहीं मिल रहा था, जिससे दमनक बहुत असंतुष्ट और महत्वाकांक्षी था।
एक दिन शेर पिंगलक ने जंगल में एक तेज़ और डरावनी आवाज़ सुनी - यह आवाज़ संजीवक नाम के एक बैल की थी, जो अपने मालिक से बिछड़कर जंगल में आ गया था और ज़ोर से रंभा रहा था। शेर ने यह आवाज़ पहले कभी नहीं सुनी थी, इसलिए वह डर गया, पर उसने अपना डर अपने मंत्रियों के सामने नहीं दिखाया।
दमनक ने शेर की चिंता को पहचान लिया। उसने सोचा, "यह मेरे लिए एक सुनहरा मौका है, खुद को राजा के लिए ज़रूरी और महत्वपूर्ण साबित करने का।" उसने शेर से कहा, "महाराज, मैं जाकर पता लगाता हूँ कि यह आवाज़ किसकी है और क्या यह हमारे लिए खतरा है।"
दमनक संजीवक बैल के पास गया और बातचीत करके उसे शेर के दरबार में ले आया। शेर और बैल में दोस्ती हो गई, और धीरे-धीरे दोनों बहुत करीबी मित्र बन गए। शेर अब ज़्यादा समय बैल के साथ बिताने लगा और शिकार पर कम जाने लगा, जिससे जंगल के अन्य जानवर, जो शेर के बचे हुए शिकार पर निर्भर थे, भूखे रहने लगे।
दमनक को यह देखकर ईर्ष्या होने लगी, क्योंकि अब शेर बैल को ज़्यादा महत्व देने लगा था और दमनक को नज़रअंदाज़ करने लगा था। दमनक ने एक चाल सोची - उसने शेर के पास जाकर झूठी बात कही, "महाराज, मुझे पता चला है कि संजीवक आपके खिलाफ साजिश कर रहा है। वह आपको मारकर खुद जंगल का राजा बनना चाहता है।"
फिर दमनक बैल के पास गया और उससे झूठ बोला, "मित्र, शेर तुम्हें मारकर खाने की योजना बना रहा है, सावधान रहना।" इस तरह दमनक ने दोनों मित्रों के बीच गलतफहमी और शक का बीज बो दिया, जो पहले बहुत प्रेम से रहते थे।
जब अगली बार शेर और बैल मिले, तो दोनों के मन में एक-दूसरे के लिए शक और डर भर गया था। बैल को लगा कि शेर हमला करने वाला है, और शेर को लगा कि बैल उस पर वार करेगा। डर और गलतफहमी में दोनों के बीच भयानक युद्ध हुआ, और अंत में शेर ने बैल को मार डाला।
इस तरह दमनक की चालबाज़ी और झूठी बातों ने दो सच्चे मित्रों की दोस्ती और एक की जान, दोनों को नष्ट कर दिया, जबकि दमनक खुद फिर से शेर का सबसे करीबी और भरोसेमंद मंत्री बन गया।
शिक्षा: चुगली करने वालों और झूठी बातें फैलाने वालों की बातों पर बिना जाँचे भरोसा नहीं करना चाहिए। ऐसे लोग अपने स्वार्थ के लिए सच्ची दोस्ती और रिश्तों को भी नष्ट कर देते हैं।