किसान और साँप
एक किसान की कहानी जो एक साँप पर भरोसा करके उसे रोज़ सोना देने के लालच में अपना ही बच्चे जैसा रिश्ता तोड़ देता है।
एक गाँव में एक किसान रहता था, जिसके खेत के पास एक बड़ा साँप का बिल था। एक दिन किसान ने उस बिल के पास एक सोने का सिक्का पड़ा देखा। वह बहुत खुश हुआ और उसे उठा लिया।
अगले दिन भी उसे वहाँ एक और सोने का सिक्का मिला। यह हर दिन होने लगा। किसान को समझ आ गया कि वह साँप, जो उस बिल में रहता था, उसे रोज़ एक सोने का सिक्का देता है, जैसे कोई आशीर्वाद हो। किसान साँप का सम्मान करने लगा और उसे "देवता" मानकर रोज़ दूध भी चढ़ाता था।
समय के साथ किसान धनवान हो गया। एक दिन किसान को किसी काम से दूसरे गाँव जाना पड़ा। उसने अपने बेटे को सारी बात बताई और कहा, "रोज़ इस बिल के पास जाना और जो सिक्का मिले, उसे उठा लेना।"
बेटा रोज़ बिल के पास जाता और एक सोने का सिक्का उठा लाता। पर बेटे के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, "अगर यह साँप रोज़ एक सिक्का देता है, तो ज़रूर इसके बिल में बहुत सारा खज़ाना दबा होगा। अगर मैं इस साँप को मार दूँ, तो मुझे एक साथ सारा खज़ाना मिल जाएगा।"
एक दिन जब साँप अपने बिल से सिक्का देने के लिए बाहर निकला, बेटे ने एक मोटा डंडा लेकर साँप पर ज़ोर से वार किया। साँप किसी तरह बचकर अपने बिल में घुस गया, पर वह बहुत ज़ख्मी हो गया और उसे बहुत गुस्सा भी आया।
उस दिन के बाद साँप ने बिल से बाहर आना बंद कर दिया और सिक्के देना भी बंद कर दिया। जब किसान वापस लौटा और उसे यह बात पता चली, तो वह बहुत दुखी हुआ। उसने बेटे को बहुत डांटा, "तुमने यह क्या कर दिया! जो हमें बिना मांगे इतना दे रहा था, उसी पर हमला कर दिया?"
किसान साँप से बहुत माफी मांगने गया, पर साँप ने कहा, "अब हमारे बीच पहले जैसा विश्वास नहीं रह सकता। तुम्हारे बेटे ने मुझे मारने की कोशिश की, और मैं उसे कभी भूल नहीं सकता। अब से न मैं सिक्के दूँगा, न ही तुम मुझ पर भरोसा करना।"
शिक्षा: लालच में किया गया विश्वासघात रिश्तों को हमेशा के लिए खत्म कर देता है। जो स्वाभाविक रूप से मिल रहा है, उसमें जबरदस्ती और लालच नहीं करना चाहिए।