लालची कुत्ता
एक लालची कुत्ते की कहानी जो ज़्यादा पाने के लोभ में अपने पास का भोजन भी खो देता है।
एक गाँव में एक कुत्ता रहता था। एक दिन उसे एक कसाई की दुकान से एक बड़ी और मोटी हड्डी मिल गई। वह बहुत खुश हुआ और उस हड्डी को मुँह में लेकर अपने घर की ओर चल पड़ा, ताकि शांति से बैठकर उसे खा सके।
रास्ते में एक नदी पर एक लकड़ी का पुल था। कुत्ता उस पुल को पार कर रहा था। जब उसने नीचे नदी के पानी में देखा, तो उसे अपनी ही परछाई दिखाई दी, जिसमें हड्डी मुँह में लिए एक और कुत्ता दिख रहा था।
कुत्ता समझ नहीं पाया कि वह उसकी अपनी परछाई है। उसने सोचा कि पानी में एक और कुत्ता है, जिसके मुँह में उससे भी बड़ी हड्डी है। उसके मन में लालच आ गया और उसने सोचा, "अगर मैं इस कुत्ते से वह हड्डी छीन लूँ, तो मेरे पास दो हड्डियाँ हो जाएँगी!"
इस लालच में उसने ज़ोर से भौंकना शुरू कर दिया, ताकि पानी में दिख रहा "दूसरा कुत्ता" डर जाए और हड्डी छोड़ दे। पर जैसे ही उसने मुँह खोलकर भौंका, उसके मुँह में पकड़ी हुई असली हड्डी पानी में गिर गई और बह गई।
अब कुत्ते के पास न तो पानी वाली काल्पनिक हड्डी थी, न ही उसकी अपनी असली हड्डी। वह बहुत पछताया और निराश होकर खाली मुँह घर लौट गया।
शिक्षा: लालच बुरी बला है। जो अपने पास की चीज़ से संतुष्ट नहीं रहता और और ज़्यादा पाने के लोभ में पड़ता है, वह अंत में अपना भी नुकसान कर बैठता है।