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संगीत प्रिय गधा

एक गधे की कहानी, जो अपनी गाने की इच्छा को रोक नहीं पाता और इसी कारण मुसीबत में फँस जाता है।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

एक सियार और एक गधा दोनों आपस में अच्छे मित्र बन गए थे। एक रात दोनों को एक किसान के खेत में घुसने का मौका मिला, जहाँ ताज़ी और रसीली सब्ज़ियाँ उगी हुई थीं। दोनों मित्र पेट भर कर खाने के लिए खेत में दाखिल हुए।

गधे ने खूब मन से ताज़ी सब्ज़ियाँ खाईं और उसका पेट पूरी तरह भर गया। सब्ज़ियाँ खाकर इतना खुश हुआ कि उसके मन में गाने की तीव्र इच्छा होने लगी। उसने सियार से कहा, "मित्र, मेरा मन बहुत खुश है, मैं ज़ोर से गाना गाना चाहता हूँ!"

सियार यह सुनकर चौंक गया और उसे समझाने लगा, "मित्र, हम चोरी से इस खेत में घुसे हैं। अगर तुम ज़ोर से रेंकोगे (गाओगे), तो किसान जाग जाएगा और हमें पकड़ लेगा। कृपया शांत रहो और चुपचाप यहाँ से निकल जाओ।"

पर गधा बहुत ज़िद्दी था। उसने कहा, "नहीं, मुझे गाना गाना ही है। संगीत मेरी आत्मा की पसंद है, मैं इसे रोक नहीं सकता।" सियार ने बहुत मनाने की कोशिश की, पर गधा अपनी बात पर अड़ा रहा।

सियार ने सोचा, "अगर यह नहीं मानेगा, तो मुझे खुद को बचाना चाहिए।" उसने कहा, "ठीक है, अगर तुम गाना ही चाहते हो, तो गाओ, पर मैं पहले इस खेत की बाहरी दीवार के पास जाकर खड़ा हो जाता हूँ, ताकि अगर किसान आए तो मैं भाग सकूँ।" यह कहकर सियार चुपचाप खेत के बाहर निकल गया।

गधे ने अपनी पूरी ताकत से ज़ोर-ज़ोर से रेंकना शुरू किया - "ढेंचू-ढेंचू!" यह तेज़ आवाज़ सुनकर किसान की नींद खुल गई, और वह तुरंत लाठी लेकर खेत की ओर दौड़ा। उसने गधे को रंगे हाथों पकड़ लिया और बहुत बुरी तरह पीटा।

बेचारा गधा अपनी गाने की ज़िद के कारण बहुत बुरी तरह घायल हुआ, जबकि चतुर सियार पहले ही सुरक्षित निकल गया था।

शिक्षा: सही समय और स्थान को समझे बिना अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण न रखना बड़ी मुसीबत में डाल सकता है। आत्म-नियंत्रण हर परिस्थिति में ज़रूरी है।

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