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शेर और चूहा

शक्तिशाली शेर और छोटे से चूहे की दोस्ती की कहानी, जो साबित करती है कि कोई भी छोटा नहीं होता।

Vishvakosh Editorial 21 June 2026 0 views

एक घने जंगल में एक शक्तिशाली शेर रहता था। एक दिन वह एक पेड़ के नीचे आराम से सो रहा था। उसी समय एक छोटा सा चूहा खेलते-खेलते उस तरफ आ गया और बिना जाने-समझे शेर के शरीर पर चढ़कर इधर-उधर दौड़ने लगा।

शेर की नींद टूट गई और वह गुस्से में उठ बैठा। उसने चूहे को अपने बड़े पंजे में दबोच लिया और गुस्से से बोला, "तेरी इतनी हिम्मत कि तूने मुझे जगा दिया! अब मैं तुझे खा जाऊँगा।"

छोटा चूहा बहुत डर गया और गिड़गिड़ाने लगा, "महाराज, मुझे माफ़ कर दीजिए। मुझे एहसास नहीं था कि आप यहाँ सो रहे हैं। मुझे जीवनदान दे दीजिए, मैं वादा करता हूँ कि किसी दिन आपकी मदद करूँगा।"

शेर यह सुनकर हँस पड़ा। उसने सोचा, "यह छोटा सा चूहा मेरी मदद कैसे कर सकता है?" फिर भी, उसे चूहे की मासूमियत पर दया आ गई और उसने उसे छोड़ दिया।

कुछ दिनों बाद, उस शेर को एक शिकारी ने जाल में फँसा लिया। शेर ने बहुत कोशिश की, पर वह जाल की मोटी रस्सियों से खुद को मुक्त नहीं कर पाया। वह दर्द और निराशा में दहाड़ने लगा।

उसकी दहाड़ सुनकर वही छोटा चूहा वहाँ दौड़कर आया। उसने देखा कि शेर जाल में फँसा है। उसे अपना पुराना वादा याद आया। बिना समय गँवाए, चूहे ने अपने तेज़ दाँतों से रस्सियों को एक-एक करके काटना शुरू किया।

कुछ ही समय में चूहे ने सारी रस्सियाँ काट दी, और शेर जाल से मुक्त हो गया। शेर बहुत हैरान और खुश हुआ। उसने चूहे को धन्यवाद देते हुए कहा, "मुझे माफ़ करना, मैंने तुम्हें छोटा और कमज़ोर समझा था, पर आज तुमने मेरी जान बचाई। तुम सच में मेरे सच्चे मित्र हो।"

शिक्षा: कोई भी प्राणी छोटा या तुच्छ नहीं होता। दया और उपकार का फल हमेशा मिलता है, और सच्ची दोस्ती शक्ति या आकार नहीं देखती।

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